माईकोर
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Satpura Mycorrh (Mycorrhiza based Biofertilizer)
Satpura Mycorrhizae is a highly effective biofertilizer based on mycorrhizal fungi. It naturally penetrates plant roots and establishes a symbiotic relationship. This relationship enhances the root system's ability to absorb nutrients and moisture, ensuring healthier plants, tolerance to drought conditions, and higher yields. It promotes sustainable farming and reduces reliance on chemical fertilizers.
is.
Product Details
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Attribute |
Description |
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Product Name |
Satpura Mycor |
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Technical Name |
Mycor (Mycorrhiza based Bio Fertilizer) |
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Composition |
Mycorrhizal fungi |
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Mode of Action |
Penetrates roots and improves nutrient and water absorption |
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Suitable Crops |
सभी फसलें – अनाज, दलहन, सब्ज़ियाँ, फल, बागवानी और वाणिज्यिक फसलें |
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प्रयोग विधि |
मिट्टी में प्रयोग, जड़ डिपिंग, बीज उपचार, ड्रिप सिंचाई |
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अनुशंसित मात्रा |
4 किलो प्रति एकड़ |
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पैकिंग आकार |
4 किलो |
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लाभ |
पोषक तत्व उपलब्धता, नमी सोखने की क्षमता, सूखा सहनशीलता और उपज बढ़ाता है |
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भंडारण निर्देश |
ठंडी और सूखी जगह पर रखें, धूप और गर्मी से बचाएं |
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सुरक्षा निर्देश |
यह सुरक्षित और गैर-विषाक्त है; सावधानीपूर्वक हैंडल करें और अशुद्धि से बचाएं |
मुख्य विशेषताएं
· जड़ सहजीविता : पौधों की जड़ों के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाता है।
· पोषक तत्व अवशोषण : फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाता है।
· नमी उपयोग दक्षता : पौधों को पानी की कमी में सहनशील बनाता है।
· मिट्टी की उर्वरता : सूक्ष्मजीव गतिविधि और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारता है।
· पर्यावरण हितैषी : 100% प्राकृतिक और सुरक्षित जैव उर्वरक, रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाता है।
लाभ
· मजबूत जड़ विकास और पौध स्थापना करता है।
· फूल बनना, फल/बीज निर्माण और उपज की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
· सूखा, क्षारीय मिट्टी और पोषण की कमी जैसी परिस्थितियों से पौधों को बचाता है।
· फॉस्फेट एवं रासायनिक खादों की आवश्यकता को कम करता है।
· सतत खेती और लाभकारी उत्पादन सुनिश्चित करता है।
प्रयोग विधि
· मिट्टी में प्रयोग : प्रति एकड़ 4 किलो अनुशंसित मात्रा को जड़ों के आसपास डालें।
· जड़ डिपिंग : पौध रोपाई से पहले जड़ों को घोल में उपचारित करें।
· बीज उपचार : बुवाई से पहले बीजों पर लगाएं ताकि शुरुआती जड़ विकास हो सके।
· ड्रिप सिंचाई : सिंचाई जल में मिलाकर सीधे जड़ों तक पहुंचाएं।